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Jagannath Puri Rath Yatra Schedule 2026: कब निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा, जानें शुभ मुहूर्त और संपूर्ण कार्यक्रम

On: June 17, 2026 2:04 PM
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Jagannath Puri Rath Yatra Schedule 2026
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Jagannath Puri Rath Yatra Schedule 2026: भारत की सबसे प्रसिद्ध और भव्य धार्मिक यात्राओं में से एक जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का विशेष महत्व है। हर वर्ष ओडिशा के पुरी शहर में आयोजित होने वाली यह यात्रा लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विशाल रथों को भक्त अपने हाथों से खींचते हैं। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

वर्ष 2026 में भी जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का आयोजन पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ किया जाएगा। यदि आप इस पवित्र यात्रा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं या इसके धार्मिक महत्व को जानना चाहते हैं, तो यहां आपको रथ यात्रा 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा समय और संपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी मिलेगी।

Jagannath Puri Rath Yatra 2026 कब है?

वर्ष 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार यह यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित होती है।

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रथ यात्रा 2026 की मुख्य जानकारी

विवरणजानकारी
पर्व का नामजगन्नाथ रथ यात्रा
तिथि16 जुलाई 2026
दिनगुरुवार
तिथि (पंचांग)आषाढ़ शुक्ल द्वितीया
नक्षत्रआश्लेषा
सूर्योदयसुबह 05:33 बजे
सूर्यास्तशाम 07:20 बजे
शुभ पूजा मुहूर्तसुबह 05:33 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

Jagannath Rath Yatra 2026 का शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को शुभ मुहूर्त में करने से विशेष फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए सबसे शुभ समय निम्नानुसार है:

शुभ मुहूर्त

सुबह 05:33 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

विशेषज्ञों के अनुसार प्रातःकाल (Pratah Kaal) का समय पूजा-पाठ और भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए सबसे अधिक शुभ माना गया है।

यदि आप अपने घर में भगवान जगन्नाथ की पूजा करना चाहते हैं तो इस समय पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त हो सकता है।


भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक महत्व

जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, भक्ति और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने मंदिर से निकलकर अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं।

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर निकलते हैं। ऐसे भक्त जो किसी कारणवश मंदिर के अंदर जाकर दर्शन नहीं कर पाते, उन्हें इस दिन भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है।

हिंदू धर्म में यह भी माना जाता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान के रथ को खींचने वाले भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।


रथ यात्रा में निकलने वाले तीन दिव्य रथ

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसके तीन विशाल रथ हैं। हर वर्ष इन रथों का निर्माण नए सिरे से किया जाता है।

1. नंदीघोष रथ

यह रथ भगवान जगन्नाथ का होता है।

  • ऊंचाई लगभग 45 फीट
  • 16 पहिए
  • पीले और लाल रंग की सजावट

2. तालध्वज रथ

यह भगवान बलभद्र का रथ होता है।

  • 14 पहिए
  • हरे और लाल रंग की सजावट

3. दर्पदलन रथ

यह देवी सुभद्रा का रथ होता है।

  • 12 पहिए
  • काले और लाल रंग की सजावट

इन तीनों रथों को हजारों श्रद्धालु रस्सियों की सहायता से खींचते हैं। यह दृश्य दुनिया भर के पर्यटकों और भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।


Jagannath Puri Rath Yatra 2026 Schedule

रथ यात्रा का आयोजन कई दिनों तक चलता है। मुख्य कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

16 जुलाई 2026 – रथ यात्रा

इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।

गुंडिचा मंदिर प्रवास

भगवान लगभग सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर में निवास करते हैं। इस दौरान लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

बहुदा यात्रा

गुंडिचा मंदिर से वापस श्रीमंदिर लौटने की यात्रा को बहुदा यात्रा कहा जाता है। यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है।

सुनाबेशा

वापसी यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है। इस अनुष्ठान को सुनाबेशा कहा जाता है।

नीलाद्री बीजे

यह रथ यात्रा का अंतिम चरण होता है जिसमें भगवान पुनः श्रीमंदिर में प्रवेश करते हैं।


क्या रथ यात्रा के दिन व्रत रखा जाता है?

अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न होता है कि क्या जगन्नाथ रथ यात्रा के दिन व्रत रखा जाता है?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार जगन्नाथ रथ यात्रा मुख्य रूप से उत्सव और प्रसाद वितरण का पर्व है। इसलिए इसे सामान्यतः उपवास का पर्व नहीं माना जाता।

हालांकि कुछ श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसार आंशिक उपवास या विशेष पूजा-अर्चना कर सकते हैं।


घर पर कैसे करें भगवान जगन्नाथ की पूजा?

यदि आप पुरी नहीं जा सकते तो घर पर भी भगवान जगन्नाथ की पूजा कर सकते हैं।

पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को साफ करें।
  • भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • फूल, तुलसी, धूप और दीप अर्पित करें।
  • भगवान को खिचड़ी, मालपुआ या अन्य सात्विक भोग लगाएं।
  • जगन्नाथ अष्टक या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • परिवार सहित आरती करें।

पुरी रथ यात्रा देखने क्यों पहुंचते हैं लाखों श्रद्धालु?

पुरी की रथ यात्रा विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं क्योंकि:

  • भगवान जगन्नाथ के दुर्लभ दर्शन होते हैं।
  • रथ खींचने का अवसर मिलता है।
  • आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलती है।
  • पूरे पुरी शहर में उत्सव जैसा माहौल रहता है।

2026 में पुरी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुझाव

यदि आप 2026 में रथ यात्रा देखने पुरी जाने की योजना बना रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • होटल और ट्रेन टिकट पहले से बुक कर लें।
  • भारी भीड़ को देखते हुए यात्रा की योजना समय रहते बनाएं।
  • गर्मी और उमस से बचने के लिए पानी साथ रखें।
  • प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
  • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

निष्कर्ष

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा 2026 का आयोजन 16 जुलाई 2026, गुरुवार को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन किया जाएगा। पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 05:33 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की यह दिव्य यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, भक्ति और आस्था का विराट उत्सव है।

जो भक्त इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं या श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। वर्ष 2026 की यह भव्य रथ यात्रा एक बार फिर करोड़ों श्रद्धालुओं को भक्ति और उत्साह के रंग में रंगने के लिए तैयार है।

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Shubham

शुभम झोपे एक प्रतिष्ठित लेखक हैं जो "ख़बर हरतरफ़" के लिए नियमित रूप से लेख लिखते हैं। उनकी लेखनी में समकालीन मुद्दों पर गहन विश्लेषण और सूक्ष्म दृष्टिकोण देखने को मिलता है। शुभम की लेखन शैली सहज और आकर्षक है, जो पाठकों को उनके विचारों से जोड़ देती है। शेयर बाजार, उद्यमिता और व्यापार में और सांस्कृतिक विषयों पर उनकी लेखनी विशेष रूप से सराही जाती है।

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