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रूसी तेल पर भारत का ‘गेमचेंजर’ दांव! होर्मुज संकट के बीच 2030 तक टेंशन खत्म?

On: April 21, 2026 9:39 AM
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India’s strategic move on Russian oil amid Hormuz crisis, depicting India-Russia oil deal and energy security with tanker, flags, and oil infrastructure
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नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी टेंशन के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। सरकार ने रूसी तेल की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए समुद्री बीमा देने वाली कंपनियों का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले वर्षों में आयात से जुड़ी रुकावटें काफी हद तक कम हो जाएंगी।

क्या है पूरा मामला?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच टकराव और होर्मुज स्ट्रेट पर संकट ने तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में भारत ने पहले से तैयारी करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत की है।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) के नए फैसले के तहत अब पहले के मुकाबले ज्यादा रूसी बीमा कंपनियों को भारतीय बंदरगाहों पर आने वाले जहाजों को कवर देने की मंजूरी मिल गई है। ये कंपनियां प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) कवर देती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए बेहद जरूरी होता है।

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भारत ने कैसे सुलझाई सबसे बड़ी समस्या?

रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण यूरोप की बड़ी बीमा कंपनियां रूसी तेल ले जाने वाले जहाजों को कवर देने से पीछे हट रही थीं। इससे भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी—तेल तो मिल रहा था, लेकिन बीमा नहीं।

अब भारत ने रूसी और गैर-पश्चिमी बीमा कंपनियों को मंजूरी देकर इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। इससे जहाजों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रह सकेगी।

लंबी रणनीति: 2027 से 2030 तक की तैयारी

सरकार ने सिर्फ तात्कालिक समाधान नहीं, बल्कि लंबी अवधि की योजना भी बनाई है। कुछ प्रमुख बीमा कंपनियों को 2027 तक और कई अन्य को 2030 तक सेवाएं देने की अनुमति दी गई है। इसका साफ मतलब है कि भारत भविष्य के संकटों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी कर रहा है।

इसके साथ ही दुबई स्थित संस्थाओं समेत अन्य विकल्पों को शामिल कर भारत ने अपने ऊर्जा नेटवर्क को और मजबूत किया है।

क्यों अहम है यह फैसला?

  • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है
  • हाल के वर्षों में रूस से सस्ता तेल आयात तेजी से बढ़ा है
  • बिना बीमा के कोई भी तेल टैंकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेट नहीं कर सकता

ऐसे में बीमा कवर की उपलब्धता सुनिश्चित करना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है।

होर्मुज संकट के बीच ‘सेफ्टी कवच’

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के लिए एक मजबूत “सेफ्टी कवच” साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ तेल सप्लाई बनी रहेगी, बल्कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपनी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पाएगा।

कुल मिलाकर, वैश्विक दबाव, प्रतिबंधों और होर्मुज स्ट्रेट के संकट के बीच भारत ने एक संतुलित और दूरदर्शी रणनीति अपनाई है। इस फैसले से साफ है कि देश अब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर और सुरक्षित भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है. जहां 2030 तक तेल सप्लाई से जुड़ी बड़ी परेशानियां काफी हद तक खत्म हो सकती हैं।

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Shubham

शुभम झोपे एक प्रतिष्ठित लेखक हैं जो "ख़बर हरतरफ़" के लिए नियमित रूप से लेख लिखते हैं। उनकी लेखनी में समकालीन मुद्दों पर गहन विश्लेषण और सूक्ष्म दृष्टिकोण देखने को मिलता है। शुभम की लेखन शैली सहज और आकर्षक है, जो पाठकों को उनके विचारों से जोड़ देती है। शेयर बाजार, उद्यमिता और व्यापार में और सांस्कृतिक विषयों पर उनकी लेखनी विशेष रूप से सराही जाती है।

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