संपुर्ण राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से होगी धन की वर्षा, जानें इसका महत्व | Ram Raksha Stotra Hindi

Unlocking the Power of Ram Raksha Stotra: Benefits and Method
Unlocking the Power of Ram Raksha Stotra: Benefits and Method

श्रीरामरक्षास्तोत्रम् एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक संहिता है, जो भगवान श्रीराम की प्रशंसा करती है और उनके रक्षा की बात करती है। इसे पाठ करने से रोगनाशन, शत्रु नाशन, दुख नाशन, सुख समृद्धि और धन संपदा की प्राप्ति होती है। यह रामचरितमानस के संत तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया है और यह संहिता संतों और भक्तों के लिए अत्यंत प्रिय है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से मन, वाक्, और कर्म में समता आती है और भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।

॥ श्रीरामरक्षास्तोत्रम्‌ ॥

विनियोग:

अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः ।
श्री सीतारामचंद्रो देवता ।
अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः ।
श्रीमान हनुमान कीलकम ।
श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः ।
अथ ध्यानम्‌:
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,
पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम ।
वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,
रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ॥
राम रक्षा स्तोत्रम्:
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥1॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ॥2॥
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥3॥
रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥
कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥
जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥
सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ॥8॥
जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः ।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ॥9॥
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत ।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥10॥
पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः ।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥
रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन ।
नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥
जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥
वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत ।
अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ॥14॥
आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥
आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।
अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ॥16॥
तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥
फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥
शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥
आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ॥20॥
सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥
रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥
वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥
इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥
रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम ।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ॥25॥
रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम ।
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम ॥26॥
रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥
श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥
श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,
श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि ।
श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,
श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥
माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र: ।
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु ।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥31॥
लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं ।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥
कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ॥34॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥35॥
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥36॥
रामो राजमणिः सदा विजयते,
रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता,
निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं,
रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः,
सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः ॥37॥
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥

 

रामरक्षा स्तोत्र कब पढ़ना है?

रामरक्षा स्तोत्र को अधिकांशतः शुभ मुहूर्त में पढ़ना अच्छा माना जाता है। इसे सुबह उठकर या संध्या के समय पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि इन समयों पर मन शांत और ध्यान लगाने की क्षमता अधिक होती है। यदि संभव हो तो रोज़ रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना अच्छा होता है, इससे व्यक्ति को आत्मिक शक्ति मिलती है और उसकी मनोबल में सुधार होता है।

राम रक्षा स्त्रोत पढ़ने से क्या होता है?

रामरक्षा स्त्रोत का पठन कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है। यहां कुछ मुख्य लाभ दिए जा रहे हैं:

  1. रोग नाशन: रामरक्षा स्त्रोत का पठन रोगों को दूर करने में मदद कर सकता है और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में सहायक हो सकता है।
  2. दुःख नाशन: इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाले दुःखों का समाधान हो सकता है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिल सकती है।
  3. शत्रु नाशन: रामरक्षा स्त्रोत का नियमित पठन करने से शत्रुओं का नाश हो सकता है और सुरक्षा की स्थिति में सुधार हो सकता है।
  4. कष्ट नाशन: यह स्तोत्र कष्टों और संकटों को दूर करने में सहायक हो सकता है और जीवन में सुख-शांति की स्थिति का समर्थन कर सकता है।
  5. आत्मिक उन्नति: रामरक्षा स्त्रोत का पाठ करने से आत्मिक उन्नति होती है और व्यक्ति का आत्मविश्वास मजबूत होता है।
  6. धन संपदा: इस स्त्रोत का पाठ करने से धन संपदा की प्राप्ति में सहायता मिल सकती है और वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है।

इन लाभों के अलावा भक्ति और आत्मशुद्धि में भी इस स्त्रोत का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

रामरक्षा स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन करें:

  1. ध्यान: पहले तो ध्यान लगाएं और मन को शांत करें। स्तोत्र के मार्गदर्शन में श्री राम को मन में स्थापित करें।
  2. आवाहन: फिर रामरक्षा स्त्रोत के आवाहन के लिए इस मन्त्र को पढ़ें, “अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः। श्री सीतारामचंद्रो देवता। अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः। श्रीमान हनुमान कीलकम। श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः।”
  3. प्रारंभ: फिर स्तोत्र के प्रारंभ के लिए अपनी आवज़ में शुद्धता के साथ स्तोत्र का पाठ करें।
  4. समाप्ति: स्तोत्र के पाठ के बाद श्री राम की आराधना करें और आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करें।

ध्यान दें कि स्तोत्र का पाठ करते समय शुद्धता, आदर और श्रद्धांजलि के साथ करना चाहिए। इससे स्तोत्र के लाभों को अधिक समर्थन मिल सकता है।

राम रक्षा स्तोत्र वीडियो:

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