11 जुलाई से सावन माह की शुरूआत हो रही है और इस पूरे माह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव को बेलपत्र भी अर्पित किए जाएंगे। ज्योतिषियों का यह कहना है कि यदि सावन में भगवान शिव की कृपा चाहिए तो मंत्र उच्चारण के साथ बेलपत्र अर्पित करना चाहिए।
भगवान शिव को सावन मास बहुत ही प्रिय है। अन्य दिनों की अपेक्षा श्रावण मास में शिव जी की पूजा विशेष लाभ देती है। माना जाता है कि इस माह भगवान शिव की नजर अपने भक्तों पर सीधी बनी रहती है, वो उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। सावन में शिवलिंग पर दूध, जल, पंचामृत के अलावा बेलपत्र चढ़ाने का खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र को शिव जी के तीनों नेत्रों का प्रतीक माना जाता है। भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और शीतलता बनी रहती है।
बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र
नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च
नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो
दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥
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दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम् पापनाशनम् ।
अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम् ॥
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम् ।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ॥
अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम् ।
कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम् ॥
गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर ।
सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय ॥
क्यों चढ़ाए जाते हैं बेलपत्र
शिव जी को बेलपत्र चढ़ाने के पीछे एक दिलचस्प कथा है, जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से हलाहल विष निकला था। जिससे पूरी सृष्टि में कोहरम मच गया। सृष्टि को इस हाल में देखकर, सभी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की तो महादेव ने सारा हलाहल विष पिकर अपने कंठ में रख लिया। इस विष के कारण महादेव के पूरे गले में गमर्हाट पैदा हो गई। जिससे उनका गला जलने लगा। इस विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव को जल चढ़ाया और उनके मस्तिष्क को शीतल करने के लिए बेलपत्र चढ़ाए। तभी से भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा का आरंभ हुआ।














