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अलास्का में ट्रंप-पुतिन वार्ता: क्या खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध या बढ़ेगा तनाव?

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Trump-Putin Alaska Summit: अलास्का के एंकोरेज शहर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आमने-सामने बैठे। लाल कालीन स्वागत से लेकर सुरक्षा घेरे और प्रदर्शनकारियों की आवाज तक, इस मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल मचा दी है। बैठक का मुख्य एजेंडा रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की संभावनाएं तलाशना था, लेकिन संकेत बताते हैं कि राह आसान नहीं है।

लाल कालीन और दोस्ताना शुरुआत

दोनों नेता अपने-अपने विमानों से उतरकर लाल कालीन पर मिले, हाथ मिलाया और अमेरिकी राष्ट्रपति की बुलेटप्रूफ कार “द बीस्ट” में साथ बैठकर बैठक स्थल पहुंचे। यह दृश्य सतह पर दोस्ती का संकेत दे रहा था, लेकिन भीतर कूटनीति की जटिल परतें मौजूद थीं।

निजी बातचीत से लेकर विस्तारित बैठक तक

पहले यह बैठक केवल दोनों नेताओं के बीच होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे छह लोगों के डेलीगेशन स्तर पर बढ़ा दिया गया। अमेरिकी टीम में विदेश मंत्री मार्को रूबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ शामिल थे, जबकि रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव मौजूद थे। इससे साफ है कि चर्चा गंभीर और ठोस मुद्दों पर हो रही थी।

यूक्रेन सवाल पर पुतिन की चुप्पी

पत्रकारों ने पुतिन से पूछा कि क्या वे नागरिकों की हत्या रोकेंगे, लेकिन उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया और इशारे से सुन न पाने का संकेत दिया। यह चुप्पी कूटनीति के लिहाज से बहुत भारी मानी जा रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने बैठक से पहले ही रूस की नीयत पर अविश्वास जताया।

सड़कों पर गूंजते विरोध

एंकोरेज की सड़कों पर यूक्रेन समर्थक प्रदर्शनकारियों ने बैनरों और नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। यह स्पष्ट है कि यह बैठक केवल एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि भावनाओं और आक्रोश से भरी वैश्विक बहस का हिस्सा भी है।

Donald Triump Putin in alska

मीडिया और छवि की रणनीति

क्रेमलिन ने बैठक के शुरुआती पलों के वीडियो जारी किए, जिनमें दोनों नेता सहज अंदाज़ में बात करते दिखे। रूसी मीडिया ने पुतिन की प्रतिक्रियाओं को भी उभारकर दिखाया, जो यह संकेत देता है कि रूस इस मुलाकात को जनसंपर्क के अवसर की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

ट्रंप का फंडरेज़िंग और राजनीतिक फायदा

बैठक के दौरान ही ट्रंप की टीम ने सपोर्टर्स को फंडरेज़िंग ईमेल भेजा, जिसमें इसे दुनिया के लिए “बड़ा दांव” बताया गया। इससे साफ है कि ट्रंप इस वार्ता को अपने चुनावी अभियान में भी भुनाना चाहते हैं।

ताकत का संदेश

बैठक के दिन अमेरिकी बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर और फाइटर जेट्स ने अलास्का के आसमान में उड़ान भरी। यह सिर्फ संयोग नहीं था, बल्कि रूस के लिए एक सूक्ष्म सैन्य संदेश भी था।

रूस का पुराना प्रतीक

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव “CCCP” लिखी शर्ट पहनकर पहुंचे, जो सोवियत संघ का प्रतीक है। यह अतीत की ताकत को वर्तमान संदेश में पिरोने का संकेत माना जा रहा है।

वास्तविक चुनौती

भले ही आधिकारिक एजेंडा युद्ध और स्थिरता पर केंद्रित था, लेकिन पुतिन की चुप्पी, ज़ेलेंस्की का अविश्वास और सड़कों पर हो रहे विरोध इस बात का संकेत हैं कि भरोसे की खाई अब भी गहरी है।

भारत का उल्लेख

ज़ेलेंस्की ने भारत के स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि भारत शांति प्रयासों में योगदान देगा। यह यूक्रेन की वैश्विक दक्षिण से समर्थन पाने की कोशिश का हिस्सा है।

ऐतिहासिक संदर्भ

पुतिन की यह अमेरिका यात्रा 2015 के बाद पहली बार हुई है और ट्रंप से उनकी सीधी मुलाकात छह साल बाद हो रही है। ऐसे में इसका ऐतिहासिक महत्व है, चाहे परिणाम अनिश्चित हों।

निष्कर्ष

यह मुलाकात कूटनीतिक तस्वीर में मुस्कान और हाथ मिलाने की कहानी कहती है, लेकिन असलियत में इसमें शक्ति संतुलन, राजनीतिक हित और अविश्वास की जटिल परतें मौजूद हैं। अब दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह बैठक इतिहास में शांति का अध्याय लिखेगी या केवल राजनीति का एक और मंचन बनेगी।

Shubham

शुभम झोपे एक प्रतिष्ठित लेखक हैं जो "ख़बर हरतरफ़" के लिए नियमित रूप से लेख लिखते हैं। उनकी लेखनी में समकालीन मुद्दों पर गहन विश्लेषण और सूक्ष्म दृष्टिकोण देखने को मिलता है। शुभम की लेखन शैली सहज और आकर्षक है, जो पाठकों को उनके विचारों से जोड़ देती है। शेयर बाजार, उद्यमिता और व्यापार में और सांस्कृतिक विषयों पर उनकी लेखनी विशेष रूप से सराही जाती है।

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