करतम भुगतम मूवी रिव्यू: सरल प्रतिशोध नाटक | पूरा विश्लेषण जरूर पढ़िए

हीरो, विडंबना (शायद!) से देव नाम का होता है, जो भगवान का पर्याय है, और अपने उत्पीड़कों से बेहद सरल प्रतिशोध की कहानी में मुकाबला करता है जो अधिक बेतुका है।

Kartam Bhugtam Movie Review: Simplistic Revenge Drama | Full Analysis
Kartam Bhugtam Movie Review: Simplistic Revenge Drama | Full Analysis

करतम भुगतम मूवी रिव्यु रेटिंग: 3/5 

स्टार कास्ट:

श्रेयस तलपड़े: श्रेयस तलपड़े, जिन्होंने देव का किरदार निभाया है, ने अपने रोल में ईमानदारी और मेहनत दिखाई है। हालांकि, उनकी मासूमियत और भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रतिशोधी किरदार के लिए उपयुक्त नहीं लगी। श्रेयस के चेहरे पर गुस्से और दृढ़ता की कमी ने उनके प्रदर्शन को कमजोर कर दिया।

मधु: मधु इस फिल्म में सबसे ज्यादा प्रभावी प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने सीमा की भूमिका में गहराई और परिपक्वता का प्रदर्शन किया है। एक दयालु महिला से लेकर एक चालाक और महत्वाकांक्षी महिला तक, मधु ने अपनी भूमिकाओं में विविधता और निपुणता दिखाई है।

विजय राज़: विजय राज़ ने अन्ना के रूप में एक आध्यात्मिक पंडित की भूमिका को बखूबी निभाया है। उनकी अदाकारी में सहजता और स्वाभाविकता है, जिससे उनका किरदार विश्वसनीय और प्रभावशाली लगता है।

अक्ष पारदसानी: अक्ष पारदसानी ने जिया की भूमिका निभाई है। जिया के रूप में, अक्ष ने एक प्रेमिका की चिंता और संघर्ष को सही तरीके से प्रदर्शित किया है, लेकिन उनकी भूमिका सीमित रही है और फिल्म में उनका योगदान अपेक्षाकृत कम है।

गौरव दागर: गौरव दागर ने गौरव की भूमिका में अच्छा प्रदर्शन किया है। फिल्म के पहले भाग में, उन्होंने देव के दोस्त के रूप में अच्छा काम किया है, लेकिन दूसरे भाग में उनकी अदाकारी थोड़ी कमजोर हो जाती है।

ऋषभ कोहली: ऋषभ कोहली ने फिल्म में सीमित भूमिका निभाई है, लेकिन उन्होंने अपने किरदार को सही तरीके से निभाया है।

Kartam Bhugtam Movie Review (Image Credit – Youtube)
Kartam Bhugtam Movie Review (Image Credit – Youtube)

निर्देशक: सोहम पी. शाह

सोहम पी. शाह, जिन्होंने इस फिल्म का निर्देशन किया है, ने समय और भाग्य पर आधारित एक कहानी पेश की है। उनकी पिछली फिल्मों ‘काल’ और ‘लक’ की तरह, ‘कार्तम भुगतम’ भी भाग्य और कर्म के इर्द-गिर्द घूमती है। हालांकि, फिल्म के पहले और दूसरे भाग में अचानक बदलाव और कहानी की अविश्वसनीयता ने फिल्म को कमजोर बना दिया है। निर्देशन में कुछ कल्पनाशीलता है, लेकिन कहानी की अनियमितता और अवास्तविकता ने दर्शकों को जोड़े रखने में कमी कर दी है।

करतम भुगतम मूवी की समीक्षा: Kartam Bhugtam Movie Review

बुरा क्या है:

फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी लंबाई है। 131 मिनट की अवधि के कारण फिल्म बहुत लंबी लगती है और कहानी में गति की कमी महसूस होती है। इसके कारण दर्शकों की रुचि कम हो सकती है और फिल्म देखने में समय अधिक लग सकता है।

वॉशरूम ब्रेक:

फिल्म की लंबाई के बावजूद, वॉशरूम ब्रेक की आवश्यकता नहीं है, या शायद ही कभी! फिल्म में कुछ महत्वपूर्ण दृश्य और मोड़ होते हैं जो दर्शकों को अपनी सीट पर बांधे रखते हैं।

देखें या न देखें:

यदि आप श्रेयस तलपड़े, मधु और विजय राज़ के प्रशंसक हैं, तो ‘कार्तम भुगतम’ को एक बार देख सकते हैं। फिल्म में उनकी अदाकारी अच्छी है और कुछ दृश्य प्रभावशाली हैं। हालांकि, यदि आप एक मजबूत और विश्वसनीय कहानी की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरेगी।

भाषा:

फिल्म हिंदी में है और यह भाषा-विशेष दर्शकों के लिए बनाई गई है। हिंदी फिल्म प्रेमियों को यह फिल्म आकर्षित कर सकती है, खासकर वे जो अभिनेता श्रेयस तलपड़े, मधु और विजय राज़ के प्रशंसक हैं।

उपलब्ध:

‘करतम भुगतम’ थियेट्रिकल रिलीज़ के लिए उपलब्ध है। यदि आप सिनेमा हॉल में फिल्में देखने का आनंद लेते हैं, तो इसे थिएटर में देख सकते हैं।

रनटाइम:

फिल्म की रनटाइम 131 मिनट है। हालांकि यह अवधि फिल्म की कहानी के लिए थोड़ी लंबी लगती है, लेकिन कुछ प्रदर्शन और दृश्य इसे सहनीय बनाते हैं।


कहानी:

‘करतम भुगतम’ की कहानी एक एनआरआई देव (श्रेयस तलपड़े) की है, जो अपने पिता (अलोक गुत्च) की संपत्ति को वापस पाने के लिए भारत आता है। लॉकडाउन के दौरान पिता की मृत्यु हो जाने के बाद देव अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करता है।

देव को हर कदम पर लालफीताशाही और नौकरशाही बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस दौरान, देव अपने दोस्त गौरव (गौरव दागर) के साथ एक आध्यात्मिक पंडित अन्ना (विजय राज़) से मिलता है। अन्ना भविष्यवाणी करता है कि देव वापस नहीं जा पाएगा, और यह भविष्यवाणी उसकी यात्रा को बाधित करती है।

देव की भारतीय गर्लफ्रेंड जिया (अक्ष पारदसानी) उसकी चिंता करती है और अंततः भारत आने का फैसला करती है जब देव उसकी कॉल्स का जवाब नहीं देता। जिया को पता चलता है कि देव अब बीमार है और अन्ना और उसकी पत्नी सीमा (मधु) और बेटे समीर (ऋषभ कोहली) को हर जगह देखता है, भले ही वे आसपास न हों। देव की याददाश्त धुंधली हो गई है और वह एक उलझे हुए मानसिक स्थिति में है।

Kartam Bhugtam Movie Review
Kartam Bhugtam Movie Review (Image Credit – Youtube)

स्क्रिप्ट एनालिसिस:

फिल्म के पहले भाग में देव की समस्याओं का यथार्थवादी चित्रण है, लेकिन दूसरे भाग में कहानी अविश्वसनीय हो जाती है। देव और जिया की कहानी कुछ घटनाओं के साथ उलझती है जो अविश्वसनीय लगती हैं। जिया की प्रतिक्रिया और उसके भारत आने का निर्णय भी अव्यवस्थित और अप्राकृतिक लगता है। गौरव की कहानी और उसके किरदार की विश्वसनीयता भी कमजोर है।

स्टार प्रदर्शन:

श्रेयस तलपड़े ने देव की भूमिका में ईमानदारी दिखाई है, लेकिन वह प्रतिशोधी देव की भूमिका को पूरी तरह निभा नहीं सके। उनके चेहरे पर आवश्यक क्रोध और दृढ़ संकल्प की कमी दिखाई देती है। मधु ने सीमा की भूमिका में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनकी संवाद अदायगी और भावनात्मक दृश्य उत्कृष्ट हैं। विजय राज़ ने अन्ना के रूप में अच्छी भूमिका निभाई है। गौरव दागर और अक्ष पारदसानी ने भी अपनी भूमिकाओं को सही तरीके से निभाया है।

Kartam Bhugtam Movie Review (Image Credit – Youtube)
Kartam Bhugtam Movie Review (Image Credit – Youtube)

निर्देशन और संगीत:

सोहम पी. शाह ने समय और भाग्य पर आधारित कहानी पेश की है, लेकिन फिल्म का निर्देशन कहानी को दो अलग-अलग भागों में विभाजित करता है। संगीत में कोई विशेषता नहीं है और पृष्ठभूमि संगीत बहुत अधिक शोरगुल और कर्कश है। फिल्म की दिशा में अचानक परिवर्तन और अविश्वसनीय घटनाओं की श्रृंखला ने फिल्म को कमजोर कर दिया है।

Kartam Bhugtam Movie Review (Image Credit – Youtube)
Kartam Bhugtam Movie Review (Image Credit – Youtube)

आखरी शब्द:

‘करतम भुगतम’ एक अच्छा प्रतिशोधी फिल्म नहीं बन पाई है और न ही एक जीवन के टुकड़े का नाटक। फिल्म एक अनूठी थ्रिलर बनने का एक अच्छा मौका खो देती है। दर्शकों को एक विश्वसनीय और तार्किक कहानी की जरूरत होती है जो उन्हें जोड़ सके। ‘करतम भुगतम’ इस मानक पर खरा नहीं उतर पाई है।

इस तरह की फिल्मों से हमें यह सीखने की जरूरत है कि केवल अलग होना ही एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। दर्शकों को एक विश्वसनीय और तार्किक कहानी की जरूरत होती है जो उन्हें जोड़ सके। ‘करतम भुगतम‘ इस मानक पर खरा नहीं उतर पाई है।

करतम भुगतम मूवी ट्रेलर:

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Team K.H.
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